Aayan The Super Hero - Chapter 1
"अयान, तुम्हारे सिर्फ 36 नंबर! साल का सबसे कम स्कोर!"
टीचर की तेज़ आवाज़ पूरी कक्षा में गूंज उठी।
कुछ समय के लिए, लखनऊ नंबर 1 मिडिल स्कूल की ग्रेड 3 कक्षा के सभी स्टूडेंट कक्षा की अंतिम पंक्ति में बैठे लंबे और पतले लड़के की तरफ देखने लगे। समय-समय पर कुछ स्टूडेंट हंस भी रहे थे।
सभी की तिरस्कार भरी नज़रों के नीचे, अयान की आँखों में एक अजीब सी बेचैनी चमक उठी। लेकिन आखिरकार, वह मंच तक गया और टीचर से अपना टेस्ट पेपर ले लिया।
"ओह! हमारे ये पागल अयान ने फिर से 'रिकॉर्ड' तोड़ दिया! 750 के कुल स्कोर में से, इसे सौ नंबर तक पहुंचने में भी मुश्किल हो रही है। यह तो वाकई चौंकाने वाली बात है!""हाहा... ये पागल एक सदी में एक बार मिलने वाला स्टूडेंट है। पिछले साल इसने राष्ट्रीय गणितीय ओलंपियाड में सिल्वर मेडल जीता था। लेकिन जब उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय ने इसे स्पेशल ऑफर दिया, तो इसने मना कर दिया। क्योंकि अयान को मुंबई जाना था!""हंह... अगर ये मुंबई चला जाता, तो क्या मुख्य मंत्री बनने के लिए चुनाव नहीं लड़ सकता था?"
अयान ने पिछले साल में ये ताने इतनी बार सुने थे कि अब उसे फर्क नहीं पड़ता था।
एक साल पहले, वह स्कूल का सबसे होशियार स्टूडेंट था। हर कोई उसकी तारीफ करता था।
लेकिन हाई स्कूल के दूसरे साल के दूसरे सेमेस्टर में, उसके शरीर में अचानक अजीब बदलाव आने लगे। जब भी वह पढ़ाई पर ध्यान लगाने की कोशिश करता, उसकी हड्डियों में तेज़ दर्द होने लगता। उसकी मांसपेशियाँ सिकुड़ने लगतीं, और कई बार तो वह बेहोश होते-होते बचता।
इस वजह से, अयान के नंबर गिरते चले गए। जो कभी क्लास का सबसे होशियार बच्चा था, अब सबसे नीचे पहुँच चुका था। लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे।
इसी समय, टीचर फिर बोले, "काव्या, कुल 675 नंबर के साथ कक्षा में पहले स्थान पर और पूरे स्कूल में आठवें स्थान पर है! हमारी छठी कक्षा में वही एकमात्र स्टूडेंट है जो टॉप टेन में आयी है। सबको इससे सीखना चाहिए!"
कक्षा में यह सुनकर हलचल मच गई।
लखनऊ मिडिल स्कूल पूरे उत्तर प्रदेश स्टेट में सबसे अच्छा स्कूल था। अगर कोई स्टूडेंट मॉक परीक्षा के टॉप टेन में आ जाता, तो यह लगभग तय था कि वह उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय में एडमिशन ले लेगा। और अगर वह और भी अच्छा करता, तो उसे मुंबई जैसी बड़ी यूनिवर्सिटी में जाने का मौका मिल सकता था।
लेकिन सबसे खास बात यह थी कि काव्या सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि अपने स्टाइल की वजह से भी मशहूर थी। वह फैशनेबल कपड़े पहनती थी और अक्सर स्कूल के नियमों को नज़रअंदाज़ कर देती थी। यहाँ तक कि वह कभी-कभी कक्षा में मिनीस्कर्ट और ऊँची एड़ी के जूते पहनकर आ जाती थी।
लेकिन उसके नंबर बहुत अच्छे थे, इसलिए स्कूल के टीचर इस पर ध्यान नहीं देते थे।
कोई फर्क नहीं पड़ता कि समय कैसा भी हो, काव्या हमेशा कक्षा की सबसे चमकदार हस्ती थी। न सिर्फ उसके हमउम्र लड़के, बल्कि कुछ युवा अध्यापक भी उसे देख कर प्रभावित हो जाते थे।
इस समय, काव्या गर्व से भरी सफेद हंस की तरह मंच की ओर बढ़ी।
जब वह अपनी सीट पर वापस जा रही थी, तो उसका हाथ फिसला, और एक एग्जाम का पेपर नीचे गिर गया, जो सीधे अयान के पैरों के पास जा पहुँचा।
अयान ने अनजाने में उसे उठाने के लिए नीचे झुककर पेपर उठा लिया और उसे लौटाने के लिए काव्या की ओर बढ़ा। लेकिन जैसे ही उसने उसकी ओर देखा, उसे काव्या की आँखों में घृणा और नफरत दिखी।
काव्या ने बेरुखी से कहा, "अयान, अब मेरा बॉयफ्रेंड विनय है! अगर तुम मेरे करीब आए, तो लोग गलत मतलब निकाल लेंगे!"
ये शब्द सुनकर, अयान का शरीर हल्का सा कांप उठा। उसके होंठों पर एक कड़वी मुस्कान उभर आई। उसने शांत आवाज में कहा, "काव्या, तुम ज़रूरत से ज्यादा सोच रही हो। मैंने बस तुम्हारा टेस्ट पेपर उठाया था।
"ज़रूरत से ज्यादा? हुह... क्या तुमने कभी ये नहीं सुना कि एक ऊँचाई पर उड़ने वाला बाज़ सांपों के साथ नहीं रहता?" काव्या की आवाज बेहद ठंडी थी।अयान, तुम अब वो टैलेंटेड लड़के नहीं रहे जो एक साल पहले थे। हम दोनों अब अलग-अलग दुनिया के लोग हैं। मेरी नज़रों में, अब तुम सड़क पर पड़े कचरे से ज्यादा कुछ नहीं हो। यह पेपर तुम्हारे छूने के बाद गंदा हो गया है। मुझे यह नहीं चाहिए!" काव्या की ये बेरुखी देखकर, अयान का दिल टूट सा गया।
एक साल पहले, वह स्कूल का स्टार था। काव्या भी उसे पसंद करती थी।
जिस दिन अयान ने ओलंपिक गणित प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता था, उसी दिन काव्या ने खुद उसे प्रपोज़ किया था। वे दोनों एक कपल बन गए थे। बाहर से देखने पर, वे एक परफेक्ट कपल लगते थे—एक होशियार लड़का और एक खूबसूरत लड़की।
अयान की मदद से, काव्या के नंबर भी बढ़ गए। वह कक्षा के मिडिल और लो लेवल से उठकर टॉप पर आ गई।
लेकिन जब अयान की तबीयत बिगड़ने लगी और उसके नंबर गिरने लगे, तो काव्या ने बिना किसी झिझक के उसे छोड़ दिया। कुछ ही समय में, उसने स्कूल के एक लड़के विनय के साथ रिश्ता बना लिया।
अयान को अंदाज़ा भी नहीं था कि काव्या इतनी बेरहम होगी और उसे सबके सामने अपमानित करेगी।
"क्या? ड्रैगन साँप के साथ नहीं रहता?!"
अयान ने इस वाक्य को मन ही मन दोहराया। फिर अचानक उसकी काली आँखों में एक चमक आई और उसने गहराई से सोचते हुए कहा,
कभी पूरब का राज, कभी पश्चिम का राज – समय हमेशा बदलता रहता है!"
अगर यह एक साँप भी है, तो एक दिन ऐसा आएगा जब यह ड्रैगन में बदलेगा और आसमान में उड़ जाएगा! और तुम दोनों—न तुम, न ही विनय—मेरी नज़र में ड्रैगन हो। तुम दोनों तो बस बदबूदार पानी में रेंगते छोटे कीड़े हो!"
"अयान! तुमने मुझे डाँटने की हिम्मत कैसे की?"
काव्या का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसने दाँत भींचते हुए कहा, "हम्म... क्या तुम जानते हो कि विनय के पिता कौन हैं? वे अग्रवाल इंडस्ट्री के मालिक हैं, जिनकी कुल प्रॉपर्टी करोड़ों में है! विनय तो बस अपनी एक उंगली से तुम्हें कुचल सकता है!"
काव्या की इस धमकी पर अयान की आँखें चमक उठीं। वह कुछ कहने ही वाला था कि तभी मंच से टीचर की आवाज़ आई,
"अयान! तुम काव्या के सामने क्या कर रहे हो? तुरंत अपनी जगह पर जाओ!"
टीचर, अयान मुझे परेशान कर रहा है!" काव्या ने जानबूझकर दुखी होने का ड्रामा किया और तुरंत शिकायत कर दी।
टीचर ने बिना सोचे-समझे फटकार लगाई, "अयान, मुझे लगा था कि तुम सिर्फ कमजोर स्टूडेंट हो, लेकिन मुझे नहीं पता था कि तुम्हारा व्यवहार भी इतना घटिया है! तुरंत क्लास से बाहर निकलो!"
जैसे ही टीचर ने यह कहा, काव्या ने पीछे मुड़कर अयान को एक विजयी मुस्कान दिखाई।
अयान ने बस कंधे उचका दिए और बिना कोई बहस किए क्लास से बाहर निकल गया। लेकिन उसके मन में एक कसम उभर चुकी थी
काव्या, आज का यह अपमान मैं तुम्हें सौ गुना लौटाऊँगा!
मैं अपनी ताकत से साबित करूँगा कि असली ड्रैगन कौन है!जिस दिन ड्रैगन को पानी मिलेगा, ब्रम्ह नदी
उलटी बहेगी!
जिस दिन बाघ पहाड़ पर लौटेगा, आधा आसमान खून से लाल होगा!
अगर मैं लौटूँगा, तो दुनिया सिर्फ मेरा सम्मान करेगी!
क्लास से निकाले जाने के बाद, अयान बेवजह गलियारे में नहीं रुका। वह खेल के मैदान के किनारे टहलता रहा और सोचता रहा—
अब कॉलेज के एग्जाम में सिर्फ 100 दिन बचे हैं, लेकिन उसकी प्रेजेंट हालत में अच्छे नंबर लाना नामुमकिन है।